कोड आन एंपावरिंग वर्क स्पेस से धर्मनगरी उज्जैन को मिलेगा बढा लाभ रात में भी खूले रह सकेंगे रेस्टोरेंट,माल,सिनेमाघर,बिजनेस सेंटर -अभी शहर में रात को श्रद्धालुओं को खाना,नाश्ता मिलने में ही होती है परेशानी

 

उज्जैन।अगर सब कुछ ठीक रहा तो सरकार की मंशा से धर्मनगरी उज्जैन को भी मध्यप्रदेश कोड आन एंपावरिंग वर्क स्पेस 2026 विधेयक के पास होते ही लाभ मिल सकेगा। इसमें रेस्टोरेंट,माल,सिनेमाघर,बिजनेस सेंटर 24 घंटे श्रम नियमों के अनुसार खुले रह सकेंगे। उज्जैन में आने वाले श्रद्धालुओं को इससे बडा लाभ मिल सकेगा । साथ ही शहर में व्यवसाय को नई गति मिल सकेगी।

वर्ष 2024 में बाजारों को 24 घंटे खोलने की कवायद शुरू हुई थी। पहले भोपाल और इंदौर में इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर किया जाना प्रस्तावित किया गया था। इसे लेकर सरकार ने नगर निगमों और औद्योगिक क्षेत्रों तक इसे ले जाने की घोषणा की थी। श्रम विभाग ने मसौदा तैयार कर लिया लेकिन नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने यह कहते हुए आपत्ति जताई कि शहरों में सफाई का काम रात में होता है, जो बाजार खुलने से प्रभावित होगा। कानून व्यवस्था की स्थिति का भी हवाला दिया गया था। वहीं, श्रम विभाग का तर्क था कि इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी, जिससे राजस्व में भी वृद्धि होगी।

उज्जैन को मिलेगा बेहतर लाभ-

शहर में प्रति दिन करीब 2 लाख श्रद्धालुओं का आगमन होता है। इनमें से मात्र 10-20 प्रतिशत श्रद्धालु ही ऐसे होटलों में ठहरते हैं जहां भोजन एवं नाश्ते की सुविधा होती है। शेष श्रद्धालु ऐसे आश्रय स्थलों में ठहरते हैं जहां मात्र चाय का सहारा ही होता है। अगर रात्रि में उन्हें भोजन या भारी नाश्ता करना हो तो इसकी उपलब्धता मुश्किल ही होती है। ऐसे में श्रद्धालुओं को रात में 11 बजे से सुबह तक खाने और भारी नाश्ता को लेकर इंतजार करना पडता है या फिर अन्य विकल्प ही उनका सहारा होते हैं। इस विधेयक के पास होने के बाद सरकार की मंशा पर धर्मनगरी उज्जैन में भी रेस्टोरेंट,माल,सिनेमाघर,बिजनेस सेंटर 24 घंटे खुले रह सकेंगे,जिसका सीधा लाभ श्रद्धालु के साथ शहरवासी ले सकेंगे। इससे शहर में राजस्व की वृद्धि होगी और आय का स्त्रोत बढ जाएगा।

अभी यह हैं हालात-

वर्तमान में शहर में रात्रि में 10 बजे बाद से ही पुलिस दुकानों को बंद करवाने के लिए अपनी गश्त को शुरू करती है। रात 11 बजे तक अधिकांश दुकानें बंद करवा दी जाती है। देवासगेट एवं मंदिर के कुछेक क्षेत्रों में यह रात्रि 12 बजे तक होता है। उसके बाद श्रद्धालुओं के लिए खाने एवं भारी नाश्ते के साथ मनोरंजन को लेकर कोई विकल्प नहीं होता है।

2 वर्ष से विचार अब अमल में आएगा-

प्रदेश में लगभग दो साल बाद रेस्टोरेंट, माल, सिनेमाघर, बिजनेस सेंटर आदि रातभर खोले रखने का रास्ता साफ हो गया है। श्रम विभाग चार कानूनों को मिलाकर मध्य प्रदेश कोड आन एंपावरिंग वर्क स्पेस 2026 विधेयक 20 जुलाई से प्रारंभ होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में प्रस्तुत करने जा रहा है। इसमें प्रविधान को संशोधित किया जा रहा है, जिससे कामगारों की सुविधा के लिए 24 घंटे दुकानें खोली जा सकें। हालांकि, यह कहां खुलेंगी और कहां नहीं, इसका अधिकार सरकार को होगा। स्थानीय परिस्थितियों को देखकर इस पर निर्णय लिया जाएगा। पूर्व से ही महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और तेलंगाना में चिह्नित स्थानों पर बाजार 24 घंटे खोलकर रखने की अनुमति है। इसमें माल, रेस्टोरेंट, बिजनेस सेंटर, सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े कार्यालय शामिल हैं।इस नए कानून में महिलाओं के कार्यस्थल को लेकर भी बड़ा बदलाव किया गया है। अब महिलाओं को रात में काम करने की अनुमति होगी, बशर्ते नियोक्ता केंद्र सरकार के ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड, 2020 के तहत तय सुरक्षा, ट्रांसपोर्ट, इंफ्रास्ट्रक्चर और लिखित सहमति की शर्तों को पूरा करते हों। इसके साथ ही, नए कानून के तहत राज्य में दुकानों, मॉल और दफ्तरों को 24 घंटे यानी सातों दिन चौबीस घंटे संचालित करने की छूट दी जाएगी।

विधेयक में कामगारों के हित और नए प्रविधान
मध्य प्रदेश कोड आन एंपावरिंग वर्क स्पेस 2026 विधेयक में कामगारों के हित में कई प्रविधान किए जा रहे हैं। इसमें एक 24 घंटे रेस्टोरेंट, माल, सिनेमाघर आदि खोला जाना भी शामिल है। इसके पीछे तर्क यह है कि निवेश को प्रोत्साहित करने वाली नीतियों के कारण बड़ी संख्या में उद्योग आ रहे हैं। आइटी के क्षेत्र में तेजी के साथ काम हो रहा है। कई कंपनियों में 24 घंटे तीन-तीन पालियों में काम होता है। ऐसे में रात में काम करने वाले कर्मचारियों को खाने-पीने की दुकानें बंद होने से परेशानी होती है। इसे देखते हुए प्रविधान प्रस्तावित किया है। वहीं, रात की पाली में काम करने वाले कर्मचारियों को दिन में काम करने वाले कर्मचारियों की तुलना में कार्यावधि का लाभ देना भी प्रस्तावित किया है। यह अवधि कितनी रहेगी, यह सरकार निर्धारित करेगी।

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